सदा सकारात्मक माहौल कैसे बनाये

सकारात्मक माहौल बनाने का सबसे अच्छा तरीका है एक- दूसरे की भावनाओं की कद्र करना एक-दूसरे की बातों को गंभीरता से सुनना और कोशिश करना की जो भी परेशानी है एक-दूसरे के जीवन में उसे आपस में मिलकर हल करने की कोशिश करना एक-दूसरे के सुख-दुख को बांटना जिससे धीरे-धीरे आपस में विश्वास बढ़ेगा तथा सहयोग की भावना भी प्रबल होगी और स्वत: ही सकारात्मक माहौल बनना शुरू हो जाएगा जब कोई किसी भी कार्य को कर रहा हो तो उसे उस कार्य को करने देना चाहिए उसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए
हस्तक्षेप करने से कार्य करने की क्षमता प्रभावित होती है अर्थात आत्मविश्वास को चोट लगती है ध्यान भंग होता है एकाग्रता में बाधा उत्पन्न होती है तो जब कोई कार्य करें तो उस कार्य मे सफलता और असफलता मानये नहीं रखता है मायने रखता है उसके कार्य करने कि कितनी क्षमता है कितना आत्मविश्वास है कितनी बार असफल हो कर सफल होने के लिए तत्परता है जब हम किसी को छूट देते हैं तो उसे आत्मविश्वासी बनाते हैं उसे आत्मनिर्भर बनाते हैं जिससे उसका खुद पर भरोसा धीरे-धीरे कायम होने लगता है 

कुछ बेहद खास तरिके है सकारात्मक वातावरण निर्माण के लिए 

1. किसी को ये एहसास नहीं होने दे की वो अकेला है बल्कि उसके साथ हम खड़े हैं

2. उसे ये एहसास दिलाना होगा की तुम्हारी सफलता केवल तुम्हारी नहीं हैं बल्कि तुम्हारी सफलता पर दूसरों की सफलता और असफलता निर्भर करती है

3. सबसे पहले ये समझना होगा की किसी भी कार्य को करने से पहले ये नही सोचना की लोग क्या सोचते हैं क्योंकि तुम्हारी सोच महत्वपूर्ण और निर्णायक होगी न की किसी और की दूसरे लोगों की सोच

4. आकर्षक ही आकर्षक को आकर्षित करता है अर्थात अगर हम सदा सकारात्मक सोच रखेंगे तो धीरे-धीरे हमारे आस-पास का माहौल भी उसी रूप में परिवर्तित होना शुरू हो जाता है

5. जैसा हम सोचते हैं परिस्थियां धीरे-धीरे वैसी ही बनने लगती है क्योंकि ऊर्जा ही ऊर्जा को आकर्षित करती है जब हम सकारात्मक सोच रखेंगे तो सब-कुछ धीरे-धीरे सकारात्मक माहौल में परिवर्तित होना शुरू हो जाएगा और अगर हम नकारात्मक सोच रखते हैं तो सब-कुछ नकारात्मक रूप में परिवर्तित होना शुरू हो जाएगा

6. सकारात्मकता माहौल तभी बनेगा जब हम ऐसा चाहेंगे क्योंकि जहां चाह है वहीं राह है और अगर हम चाहेंगे ही नहीं तो सकारात्मकता माहौल कैसे बनेगा क्योंकि हर किसी को परिस्थितियों को अपनी सोच के अनुसार बदलना आना चाहिए और ये सकारात्मक माहौल की सबसे बड़ी बुनियाद है

कार्य करने के लिए सकारात्मक वातावरण बनाने के लिए गतिविधियाँ कौन सी होनी चाहिए 

1. सबसे पहले तो कार्यालय को कार्यालय की तरह नहीं अपने दूसरे घर के रूप में देखना चाहिए
2. साथ में काम करने वालों को अपने परिवार का ही सदस्य समझना चाहिए
3. एक -दूसरे की मदद के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए
4. सब को पूरी टीम को एक साथ बैठ कर लंच करना चाहिए
5. जो काम किसी से नहीं हो रहा है तो उस काम को करने में उसकी हर संभव मदद करनी चाहिए
6. समय-समय पर पूरी टीम को एक साथ घूमने के लिए बाहर जाना चाहिए
7. साथ में पूरी टीम को इंडोर गेम्स तथा आउटडोर गेम्स खेलना चाहिए
8. माहौल कार्यालय का सदा खुशनुमा रखना चाहिए और किसी को किसी की बात का बुरा नहीं मानना चाहिए

घर में सकारात्मक वातावरण कैसे बनाएं

1. घर में सदैव हमें खुश रहना है कोशिश करनी है की कोई भी ऐसी बात न बोलें जिससे किसी को ठेस पहुंचे
2. क्रोध का पूरी तरह से त्याग कर देना है सदैव मुस्कुराते रहना है
3. हर किसी को सम्मान देना है घर के छोटे सदस्यों का भी
4. सबकी बात गंभीरता पूर्वक सुनना है और किसी को कोई समस्या है तो उसका निवारण करना है
5. सदा खुशनुमा माहौल घर का रखना है
6. हमेशा हंसी मजाक करना है
7. परिवार को पूरा समय देना है
8. घूमने के लिए साथ में पूरी परिवार को बाहर जाना चाहिए 9. साथ में इनडोर गेम्स तथा आउटडोर गेम्स खेलना है
10. खुशियों को बांटने से खुशीयां आती है

सकारात्मक कार्य वातावरण के अनुरूप करना

1. हर किसी के नये सुझाव का स्वागत
2. सब को खुली छूट की कार्य को अपने तरीके से कर सकते हैं
3. सबके साथ एक जैसा व्यवहार किसी को न ज्यादा न काम
4. सबका सम्मान एक जैसा न की किसी को विशेष सम्मान
5. सुविधाएं भी कार्यलय में समान रूप से किसी के लिए विशेष सुविधा नहीं
6. सबकी तन्खाह भी एक जैसी तभी समानता का भाव आएगा जिससे प्रगति और विकास होगा
7. कार्यालय में भेदभाव का कोई स्थान नहीं
8. किसी कार्य में गलती होने पर कोई चिल्ला चीख नहीं
9. कार्यालय में ऊंचे शब्दों में बात करके झगड़ा की मनाही उनके खिलाफ सख़्त कार्रवाई 10. जो भी कार्यालय में काम करें उन्हें ये एहसास हो की अब उनका नौकरी यहां सदा के लिए सुरक्षित है


हमेशा पॉजिटिव कैसे सोचे 

हमेशा अपने आप पर विश्वास रखे तथा ये हमेशा निर्धारित कर ले की चाहे जीवन में कैसी भी परिस्थिति उत्पन्न हो जाएगी आप बिना विचलित हुए उसका सामना एक नयी आशा के साथ करेंगे
पॉजिटिव सोचने के लिए हमें सबसे पहले पॉजिटिव रहने पड़ेगा तभी तो हर परिस्थितियों को हम अपनी पॉजिटिविटी से हरा पाएंगे
पॉजिटिव सोचने के लिए हमें निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए

1. आशाओं से भरा हुआ मन होगा 

आशाओं से भरा मन अपने आप में ही सर्वश्रेष्ठ भावनाओं का सूचक होता है जो भी मनुष्य अपने कार्य में आशावान होता है वो कभी असफल नहीं हो सकता है

2. अपने निर्णय पर भरोसा रखना 

जब आप कोई भी कार्य करते हैं और आप को अपने कार्य पर पूर्ण भरोसा है तो आधी सफलता तो आप ने ऐसे ही प्राप्त कर ली बाकी बची आधी सफलता अपने कार्य में पूर्णतः समर्पित होकर करने से प्राप्त हो जाएगी

3. दूसरो की निंदनीय भावनाओं से मुक्त होना 

दूसरों की निंदा करना एक ऐसी भावना है जिसमें अगर मनुष्य लिप्त हो गया तो उसका ध्यान केवल दूसरों के कार्यों पर ही केंद्रित होगा तथा अपने मूलभूत कार्य पर उसका अविश्वास बढ़ेगा क्योंकि उस मनुष्य को ऐसा लगता है कि किसी की आलोचना करने से उसे थोड़ी राहत मिलती है मगर इससे उसकी नाकामयाबी कम नहीं होती इसलिए मनुष्य को अपनी नाकामयाबी को कामयाबी में बदलने के लिए सबसे पहले दूसरों की निंदा करते से बचना चाहिए जिससे पॉजिटिविटी सोचने की क्षमता कायम रहेगी

4. दूसरों के सहयोग के लिए तत्परता दिखाना

जो मनुष्य दूसरों की बुरी परिस्थितियों में साथ देता है उसे बुरी परिस्थितियों से उबारने में मदद करता है तो वैसा मनुष्य अपने भविष्य के लिए एक कवच तैयार कर रहा है जिसमें उसके आने वाले बुरे समय में उसकी सहायता के लिए एक लंबी कतार होगी उसे सोचने की आवश्यकता नहीं है अगर कोई मनुष्य दस लोगों की मदद करता है और जब उस मनुष्य को स्वयं ही आवश्यक की जब जरूरत पड़ेगी तो उन दस लोगों में कम से कम एक आदमी तो अवश्य ही उसकी मदद के लिए आगे आएगा इस प्रकार ये एक चेन की तरह ही उसके बेहतर भविष्य की सुरक्षा प्रदान करेगी

5. सबके लिए संवेदनशील बनना 

सबके लिए संवेदनशील बनना ही पॉजिटिव सोच की सबसे बड़ी निशानी है क्योंकि ऐसी सोच हमें जिम्मेदारी बनाती है सबके लिए खुद के लिए अपने परिवार के लिए अपने समाज के लिए अपने व्यवहार के लिए अपने व्यापार के लिए अपने देश के लिए जिसमें केवल सबके भले की भावना निहित होती है और ऐसा मनुष्य जीवन में सदैव सम्मान प्राप्त करता है

6. हमेशा मुस्कुराते रहना :- मुस्कुराते रहने से हम जीवन में आये भीषण से भीषण दुःख से उबर सकते हैं
हर किसी का जीवन आसान नहीं होता है जीवन में बाधाएं कदम -कदम पर खड़ी रहती है उसका सामना करने के लिए हमें मुस्कुराने का हुनर आना चाहिए ताकि बाधाओं को हंसते खेलते हम पार कर सके
चलना ही जीवन है रूक जाना अंत है इसलिए सदैव हमें गतिशील रहना है रूकना नहीं है
हर परिस्थिति का सामना मुस्कुराते हुए ही करना है

नकारात्मक विचार को कैसे दूर करें 

नकारात्मक विचार को केवल सकारात्मक विचार से ही दूर किया जा सकता है
जब भी मन में नकारात्मक विचार आते हैं तो हम केवल बुरा ही सोचते हैं खुद के लिए और खुद के भविष्य के लिए भी लेकिन उसी क्षण हम अगर नकारात्मक विचार के प्रभाव से तत्काल मुक्त होकर उसी परिस्थिति को सकारात्मक रूप से सोच के देखें खुद के लिए और अपने भविष्य के लिए तो हमे थोड़ी राहत मिलेगी ठीक बिल्कुल इसी क्षण हम ये निर्णय ले की हमे ऐसा ही करना है और इसके लिए एक ठोस योजना तैयार करे और रोज थोड़ा-थोड़ा उस पर ध्यान केंद्रित करके उस पर संयम के साथ   एकाग्रचित्त होकर कार्य करके सफलता प्राप्त कर ही लेंगे
क्योंकि हर दिन किया गया थोड़ा -थोड़ा कार्य सकारात्मक सोच के साथ जीवन में बड़े बदलाव और परिणाम लाती है यही सफलता का मूलमंत्र है जो की नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव से हमें मुक्त करता है

गलत सोच तभी बदलेगी जब हम खुद बदलेंगे


जब हम अच्छा सोचेंगे सकारात्मक सोच की ओर अग्रसर होंगे जिससे हमें मानसिक रूप से मजबूती और शांति प्राप्त होगी
जब हम किसी का बुरा सोचते हैं या खुद के बारे में हम बार-बार बुरा सोचते हैं जिससे हमारे मानसिक स्थिति और हमारे स्वास्थ्य पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है और धीरे-धीरे हमारा मानसिक पतन होने लगता है या फिर कहे तो हम डिप्रेशन में रहने लगते हैं किसी भी मनुष्य के लिए ये स्थिति बेहद ही खतरनाक होती है  इसलिए हमें अच्छा सोचना चाहिए जिसके अनुरूप ही हमारे आस-पास का माहौल भी बेहतर बन जाए
हम अपने सोच के अनुरूप ही अपने आस-पास की सकारात्मक ऊर्जा और नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करते हैं क्योंकि जैसा हम सोचते हैं धीरे-धीरे परिस्थितियां भी उसी के अनुरूप बनने लगती है इसलिए सदा अच्छा और सकारात्मक सोच तो जीवन में सदा सकारात्मकता और खुशहाली आएगी

सकारात्मक सोच क्या है

नकारात्मक भाव से मुक्त होना ही सकारात्मकता कहलाती है
जब भी मन में खुद के लिए निराशा का भाव उत्पन्न होने लगती है तथा चारों ओर कोई रास्ता नजर नहीं आता है तब मन में बुरे ख्याल आने लगते हैं इसे ही नकारात्मक प्रभाव कहते है और ऐसे समय में नकारात्मक विचार के बीच एक रास्ता मिल जाए इन बुरे प्रभावों से बाहर निकलने के लिए तो उसे सकारात्मकता कहलाती है
सकारात्मक सोच जहां कोई भी आशा नहीं हो वहां आशा उत्पन्न करना ही सकारात्मक सोच कहलाती है
सकारात्मक सोच के उदाहरण :-
जब कोई व्यक्ति जीवन में बुरी तरह हार चुका हो निराशा हो चुका हो लेकिन फिर वह दूसरा निर्णय लेता हैं की वह अभी नहीं हार सकता वह ऐसे हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठ सकता है और वह जी जान से कोशिश करने में लग जाता है इस सोच के साथ की वह सफल होकर रहेगा और इसी सोच के साथ वह सफल हो जाता है

1. एक -दूसरे के प्रति भरोसे की भावना का विकास

2. विकास की बातों पर खुलकर समर्थन

3. बच्चों को आत्मनिर्भर बनने के लिए उन्हें आजादी देना

4. धैर्य हर स्थिति में बनाए रखना

5. विपरित परिस्थितियों का सामना करना

6. धर्म को समाज के विकास के रुप में देखना

7. हर धर्म से प्रेम करना

8. चुनाव में वोट धर्म के नाम पर नहीं बल्कि योग्यता के कौशल पर जोर देना

9. छूआछूत की भावना को सदा के लिए मन से निकालना

10. पूरे समाज को अपना परिवार समझना

11. प्रत्येक बच्चे के बेहतर शिक्षा सुनिश्चित करना

12. बच्चों मे खेल की भावना को विकसित करना जिससे शारीरिक विकास बच्चे का हो सके जिससे आने वाली

   पीढ़ियों शारीरिक रूप से मजबूत बने

13. आपसी विवाद को प्यार से बैठ कर सुलझाने का प्रयास करना

14. धन से ज्यादा लोगों की अहमियत देना

15. स्त्रियों को उचित सम्मान देना

16. लड़कियों की बेहतर शिक्षा को सुनिश्चित करना और इसमें बिल्कुल भेदभाव नहीं करना

17. महिलाओं को अपने निर्णय लेने की पूरी आजादी देना

18. एक-दूसरे से सहयोग और प्रेम का भाव रखना समाज में सबसे साथ

19. खुद से शादी करने की आजादी लड़के-लड़कियों को मिलनी चाहिए ताकि वो अपने जीवन को जिसके साथ

 चाहे उसके साथ सुख पूर्वक व्यतीत कर सके

20. अधिक से अधिक सरकार द्वारा चलाई जाने वाली योजनाओं का ज्ञान रखना और लाभ लेना

21. देश दुनिया की बातें से रूबरू होना ताकि वर्तमान परिस्थितियों का ज्ञान हो सके

इन सारी बातों पर अगर हम गौर करें तो समाज को एक बेहतर रूप दे सकते हैं जो इतना सुंदर होगा कि जिसकी कल्पना भी हम नहीं कर सकते हैं

जीवन के 5 नकारात्मक तत्थ और उन्हें दूर करने के सकारात्मक प्रयोग


1. सदैव खुश रहें 

हमें ये तय करना है चाहे जो कुछ भी हो जाए हमें हर हाल में खुश रहना है
किसी भी परिस्थिति में बिना विचलित हुए हमें शांत और धैर्य पूर्वक परिस्थितियों को संभालना है ना की उन परिस्थितियों से मुंह चुराना है

2. लोगों का सम्मान करना 

हमें सदैव लोगों का सम्मान करना चाहिए हमें ये कभी तय नहीं करना चाहिए की उसकी जाति क्या है उसका ओहदा क्या है क्या वह गरीब है इन सारे बातों से खुद को मुक्त करके हमें समान रूप से समाज के हर वर्ग के लोगों का सम्मान रूप से सम्मान करना चाहिए

3. सहयोग की भावना 

हमें सदैव लोगों के सहयोग के लिए तत्पर रहना चाहिए बिना किसी स्वार्थ के
हमें ये नहीं देखना चाहिए की किस की सहायता करके हमें क्या लाभ होगा और क्या हानि
इन तुलनाओं से खुद को मुक्त रखकर समान रूप से लोगों की सहायता करनी चाहिए जिससे पॉजिटिविटी सोचने के तरीके में बदलाव आएगा क्योंकि अगर हम माने तो हर कोई अपना है और अगर हम नहीं माने तो हर कोई पराया है

4. प्रेम की भावना 

किसी भी देश के लोगो के लिए , समाज के लिए , स्वयं के विकास के लिए प्रेम की भावना का होना अत्यंत ही अनिवार्य है तभी तो शांति का माहौल उत्पन्न होगा जिसमें प्रत्येक वर्ग के लोग खुद को सुरक्षित महसूस करेंगे जहां भय ,नफरत, हिंसा , द्वेष ,ऊंच-नीच , जाति-धर्म से कहीं ऊपर मानवीय मूल्यों को अहमियत दी जाएगी

5. किसी से तुलना करने से बचना  

जीवन में अगर किसी को तरक्की करनी है अपने भीतर से सदा के लिए नकारात्मक ऊर्जा को निष्क्रिय करना है तो सबसे पहले हमें खुद को किसी से तुलना करने से बचना चाहिए क्योंकि किसी से किसी की तुलना नहीं की जा सकती हर कोई अपने-अपने क्षेत्र में कार्य कर रहा है और उसमें उसका प्रदर्शन अच्छा है जरूरी नहीं की कोई भी दूसरा व्यक्ति उस क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन करे हो सकता है की वो दूसरे क्षेत्र में ज्यादा अच्छा प्रदर्शन करे इसलिए सदा ऐसे विचारों से खुद को बचाना चाहिए

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