होने नहीं दे कभी अपनी हार

जब आप संकल्पित होते हैं तो आपके बड़े से बड़े आलोचक भी आपके सामने धैर्यवान व्यवहार के सामने नतमस्तक हो जाते हैं कोई खुद को खुश रहकर महत्वपूर्ण नहीं मान कर दूसरो पर चिल्लाकर अपनी नाराजगी बता कर खुद को महत्वपूर्ण साबित करने की पूरजोर कोशिश करता है मगर अगर वो इसके बदले सामने वालो को चिल्लाने की अपेक्षा खुश रखने का प्रयास करे तो वो मनुष्य सब कुछ हार कर भी जीत जाएगा जब आप जानते हैं आप सही है और सामने वाला आपकी बात मानने के लिए तैयार नहीं हो रहा हो तो उसे एक बार प्यार से अनुरोध करे हो सकता है इस बार जब आपने प्यार जताया तो उसमें अधिक आत्मविश्वास और अपनेपन का भाव हो जिसे शायद सामने वाला व्यक्ति समझ जाए कभी -कभी किसी की नाराजगी को सहर्ष स्वीकार करना भी चाहिए अगर गलती हमने की है तो हमें ही सुधारना होगा

आप हमेशा दूसरो को सुनने और समझने शक्ति विकसित करे आप को जीवन में कभी कोई दु:ख और तकलीफ का सामना नही करना पड़ेगा क्योंकि आप ने हार कर जीतने की कला विकसित कर ली है हार जाने का मतलब ये नहीं की आप निराशा के अंधेरे में डूबे जाएं बल्कि आप फिर से उस सफलता के लिए कार्य करें जो मिलकर ही रहेगी   जब मनुष्य खुद पर भरोसा करता है तो वह साहसी बन जाता है वह पूर्णतया भय मुक्त हो जाता है   उसे अपने हार का कोई भय नहीं होता क्योंकि वह पुनः विषम परिस्थितियों में भी जीतने के लिए खड़ा हो जाएगा और वो तब तक प्रयास करेगा जब तक वो जीत नहीं जाता है

मैं कैसे हार जाऊं 

मनुष्य किन कारणों से हारता है

  • जब अपने कार्य से कोई भागता है
  • किसी भी काम को करने मे संतुष्ट नहीं होता
  • दूसरों से खुद कि तुलना करता है
  • बडे -बड़े सपने देखता है पर उसे पूरा करने का प्रयास नहीं करता
  • बस किस्मत का रोना रोता रहता है
  • लोगो से केवल फायदे के लिए संबंध बनाता है फिर काम पूरा होते ही उन संबंधों को तोड़ देता है
  • हर समय नुकसान के डर से भयभीत रहता है
  • सदैव झूठ बोलता है
  • सत्य से साक्षात्कार से डरता है
  • सदैव क्रोधी लालची बना रहता है

 हार और जीत के बीच का सबसे बड़ा अंतर 

  • हार और जीत के बीच का सबसे बड़ा अंतर होता है विश्वास का आभाव अगर विश्वास है तो जीत होगी अगर विश्वास नहीं हार होगी 
  • कोशिश की कमी हार और जीत के बीच का सबसे बड़ा अंतर है क्योंकि कोशिश जीतनी बार होगी असफलता का अंतर घटता जाएगा और अगर हम कोशिश ही नहीं करेंगे तो भला जीतना संभव है स्वयं ही कल्पना कर सकते हैं
  • एक सबसे बड़ा फर्क है हार और जीत के बीच कर्म के प्रति निरंतरता से कार्य करते रहना ही जीत का द्वार खोलती है और कर्म ही नहीं करना और फल की आशा में बैठे रहना हार को और अधिक निकट खड़ी कर देती है
  • जो परिवर्तन को सहज रूप से स्वीकार करते हैं उन्हें हार और जीत के फर्क की समझ होती है और जो परिवर्तन को बाधा मानकर बैठे रहते हैं उनके लिए ये बहुत बड़ी खाई के समान होती है
  • खुद में अगर विश्वास है तो हम हार जीत के परिवर्तन के पार भी देख सकते हैं खुद की मेहनत से भविष्य की बुनियाद से मजबूत इमारत का सपना देख सकते हैं मगर हमे खुद पर विश्वास ही नहीं है तो सपने केवल मन की कल्पना तक ही सीमित रह जाएंगे 

हार और जीत की परिस्थितियों

  • हार एक गहना है जिसे पहनकर जीत के गले में वरमाला डालूंगा
  • मेरी हार मुझे जीतने का मार्ग स्वयं ही दिखाएंगी
  • हर हार जीवन में एक महान परिवर्तन लाती है
  • हार तो मन का विकार है जब तक मैं ये नहीं मान लूं कि मैं हार गया हूं तब तक मैं नहीं हारा हूं
  • संधर्ष जीतना कठिन भरा होगा सफलता उतनी ही बड़ी होगी
  • मेरी सोच मुझे हार के संबंध में सोचने ही नहीं देती क्योंकि मेरा पूरा ध्यान जीत पर केंद्रित है
  • मन का विश्वास ही जीत है और मन का अविश्वास हार है
  • मुझे ये कोई नहीं बताए कि मैं असफल हूं क्योंकि मैंने इस बारे मे खुद से बात नहीं की है
  • चलो असफलता की गहराई को नाप ही लेते हैं ताकि सफलता की ऊंचाइयों का अंदाजा हो
  • जीवन में दोनो का मजा लेते हैं असफलता और सफलता देखते हैं कौन ज्यादा स्वादिष्ट है  

जब मैंने निर्णय लिया की मैं जीतूंगा तो फिर मैं क्यों हार जाऊं मैं जीत से कम कुछ स्वीकार नहीं करता और ये मेरा अधिकार है जब मनुष्य के मन मे ऐसे भाव आ जाएं तो उसे हराना सच में मुश्किल ही नहीं असंभव होता है क्योंकि अक्सर जिद और जुनून अगर सत्य के साथ कदम मिलाकर चल रहे हैं तो समझ लेना चाहिए एक ऐसा इतिहास बना रहे हैं जो युगों-युगों तक याद किया जाएगा जीवन में कोई भी कार्य करने के लिए जोश बहुत आवश्यक है खुद पर भरोसा और जीतने का जज्बा ही जीत दिलाती है  

होने नहीं दे कभी अपनी हार

हम क्यों हारते है जीवन में उसके लिए कुछ लोग या तो माहौल को जिम्मेदार बताते है कुछ लोग तजुर्बा को जिम्मेदार बताते हैं कुछ लोग शिक्षा को लेकर मेरे हिसाब से हमारी हार का कारण इनमें से कोई भी नहीं है हम इसलिए हारते है की हमने कभी जीतने का प्रयास ही नहीं किया बस आस -पास जो लोग कहते हैं या कही कुछ देखते हैं किताबों में कुछ पढ़ते हैं इसी में उलझ जाते हैं लेकिन हमे ये समझना होगा हमारी शख्सियत इन बातों से कहीं उपर है क्योंकि हमारे जीवन में हम हार है या जीते हैं ये कोई और तय नहीं करेगा बल्कि ये हम स्वंय तय करेगे की हम वाकई मे हारे हुए हैं क्या मेरा मानना है जब इंसान सच्चे मन से अपनी गलतियों को स्वीकार करके पूरे दिल से प्रयास करता है तभी उसकी जीत की नींव तय हो जाती है चाहे जीवन की कोई भी परिस्थिति हो जीवन का सबसे महत्वपूर्ण रिश्ता हो हमेशा सच बोले अपनी गलतियों को स्वीकार करें और फिर से प्रयास करें हो सकता है आपकी बात सामने वाले को बुरी लगे मगर उसे आपके भीतर के सच को पहचानना होगा क्योंकि जीवन में कोई भी अवस्था सदैव बनी नहीं रहती परिवर्तन तो प्रकृति का नियम है बस उसे सम्मान देने की आवश्यकता है उनका साथ देने की आवश्यकता है जब हम सामने वाले को पूरे सकारात्मक नजरिये से देखते हैं तो उसका भी नजरिया सकारात्मक हो जाता है

कैसे हार जाऊँ मैं इन तकलीफों के सामने

  • जीवन में जब आप शुरुआत करते हैं स्कूल जाने की तो वहाँ आपको बचपन में डर लगता है हारने का
  • जब आप घर पर होते हैं तो वहाँ आपको अपने परिवार के सामने शर्मिंदा होने का डर होता है
  • जब आप काम पर होते हैं तो वहाँ आपको अपने सिनियर के आगे काम सही ढंग से ना करने का भय होता है
  • संस्कृति जगहों पर
  • सामाजिक माहौल में

ये डर जो हार के रूप में आपका पीछा नहीं छोड़ती है अब बस बहुत हुआ आपको इस हार के चक्रव्यूह को तोड़ना होगा इस डर के माहौल को सदा के लिए खत्म करना होगा और अपने तकलीफो के आगे घुटने नही टेकने है आपको उससे बाहर आना ही होगा जीवन में जो सपना आपने देखा है उसके लिए एक बार आप असफल हुए फिर प्रयास करे फिर असफल हुए फिर प्रयास करे ये प्रयास करना तब तक नहीं छोड़े जबतक आप सफल नहीं हो जाते और जो लोग ये चाहते हैं आप सफल हो वो लोग आपके इस प्रयास में आपकी सच्चाई को वाकई मे समझेगे जिन्हें आपसे वाकई मे प्यार है

जिंदगी की राहों पर कविता

हर बार कदम बढ़ाता हूँ हर बार घबराता हूँ

जीवन के इस पथ पर खुद को कई बार समझाता हूँ

हां मेरे भी कुछ सपने है हां मेरे दिल में भी कुछ अरमान हैं

हार जाने में नहीं बल्कि उन सपनो को पूरा करने में ही शान है

बहुत राते जाग कर निकला है मैने बुरे सपने से खुद को बचा बचा कर

आज वादा है खुद से नहीं जीऊँगा मै जीवन में अब कभी घबरा कर

संघर्षमय जीवन पर कविता

हर जगह बिखरे कांटे है धूप भी बहुत तेज है

नहीं कही कोई छांव है तपती रेत पर पांव है

भूख प्यास से हाल बेहाल है

बना जी का जंजाल है

नहीं अब रूक सकता किसी भी हाल में

मंजिल के लिए अब कभी धीमी नहीं होनी मेरी चाल है

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