कायदा एक नन्ही उम्मीद

उन नन्ही आंखों मे उम्मीद की एक किरण है उसने अपना सब कुछ खो दिया अपने माँ बाप, अपने भाई बहन, अपना हंसता परिवार अपने दोस्तों को अपने पड़ोसियों को,पर उसके आंखो मे अपनो के खोने का सूनापन जरूर है मगर मायूसी नहीं है वो एक छोटी सी नन्ही बच्ची है जिसका नाम कायदा है जो सिरीया मे हुए हमले मे अपना सब कुछ खो चुकी है उसे इस बात का दु:ख जरूर है की वो अपनों से बिछड़ चुकी है लेकिन उसे इस बात की खुशी भी है की उसे हर रोज कई अपने मिल जाते है इस रिफ्यूजी कैंप मे
हर आने वाला हर बेगाना उसे अपना लगता है कायदा की वो प्यारी सी मुस्कान देखकर रिफ्यूजी कैंप मे आने वाला हर शख्स अपने गम को भूल जाता था
इस नन्ही उम्र मे उसने जीवन का वो सबक सीखा था जो बड़े उम्रदराज लोग भी नहीं सीख पाते प्रेम का सबक
रिफ्यूजी कैंप मे आने से पहले उसके जीवन मे किसी चीज की कमी नहीं थी हर कोई उसे प्यार करता था उसके अब्बूजान उसकी अम्मी उसके भाईजान उसकी बड़ी आपा उसके दोस्त उसके पड़ोसी मगर,  एक रात जब वो सोयी तो उसे ये पता नहीं था की कल सुबह जब वो उठेगी तो उसका सब कुछ उससे छीन जाएगा उसकी दुनिया मे हंसी की वो नन्ही किलकारियां सिसकियां मे बदल जाएगी

उस रात उसके घर के करीब एक मिसाइल गिरा आसमान से जिसने उसकी दुनिया ही निगल ली
कायदा ने बड़ी मुश्किल से खुद को संभाला है और अब वो नन्ही सी जान औरो को संभालने का काम कर रही थी
किसी ने उससे ऐसा करने के लिए कहा नहीं लेकिन फिर भी उसे ये करना अच्छा लगता है
कभी -कभी उसकी आंखों की वो खामोशी सबको बेचैन कर देती थी जिसके आगे शांत समंदर की भी खामोशी छोटी लगती थी
रिफ्यूजी कैंप मे उसे इमाम चाचा लेकर आए थे जो फौजी थे जिनको बिखरे लाशों के बीच मकान के मलबे मे दबी वो नन्ही सी परी जैसी बच्ची मिली थी कायदा
इमाम चाचा के लिए कायदा सब कुछ थी इमाम चाचा की शादी नहीं हुई थी फिर भी कायदा उनकी अपनी बेटी से भी बढ़ कर थी
एक दिन एक परिवार उस रिफ्यूजी कैंप मे आया जिसमें एक छोटा सा बच्चा और एक छोटी बच्ची थी उसके माँ बाप मारे जा चुके थे एक धमाके मे जिसका ख्याल कायदा बड़ी बहन जैसे बनकर उन दोनों बच्चों का रखने लगी थी
वो दो मासूम से बच्चे अपनी सबसे प्यारी बहन को पाकर बहुत खुश थे उन बच्चों के लिए कायदा ही सब कुछ बन गयी थी कायदा थी ही इतनी अच्छी

आज  शहर मे कट्टर पंथियों के साथ सेना के जवान का भयंकर युद्ध चल रहा था चारो ओर गोलियां और धमाके की ही आवाज आ रही थी शहर आधा से अधिक खाली हो चुका था चंद लोग ही शहर मे बचे थे
कायदा के इमाम चाचा भी आज कट्टरपंथीयो से युद्ध लड़ रहे थे मगर आज इमाम चाचा थोड़े से परेशान से लग रहे थे उन्हें आज बार-बार कायदा का ही ख्याल आ रहा था
पता नहीं क्यो इमाम चाचा कायदा को लेकर बिना वजह के चिंतित हो रहे थे ऐसा लग रहा था जैसे दो युद्ध लड़ रहे हो इमाम चाचा एक बाहर कट्टरपंथीयो से और एक युद्ध खुद के भीतर खुद से ही लड़ रहे थे
तभी एक सिपाही तेजी से इमाम चाचा के करीब आकर बोला कैम्प से खबर आयी है आप के लिए ये सुनकर इमाम चाचा को लग रहा था जो डर उनके मन मे कायदा को लेकर है वो कही सच ना हो जाए
सिपाही ने बताया की कायदा बेहोश हो गई थी आज उसकी तबीयत ठीक नहीं है ये सुनकर इमाम चाचा को लग रहा था की कैसे वो सब कुछ छोड़ कर कायदे के पास पहुंच जाएं मगर उन्हें रिफ्यूजी कैंप पहुंचने मे सुबह हो गई थी
इमाम चाचा के ही तंबू मे कायदा उनके साथ रहती थी जब इमाम चाचा कैंप के अंदर घुसते ही देखा कायदा लेटी हुए थी कायदा ने उन्हें दूर से आते देख रही थी और अब बहुत प्यारी सी मुस्कान से कायदा ने इमाम चाचा का स्वागत किया रिफ्यूजी कैंप के सारे लोग कायदा को घेर के खड़े थे क्योंकि सब लोग कायदे से बहुत प्रेम करते थे
रिफ्यूजी कैंप मे एक डाक्टर ने बताया की उसने कायदा के ब्लड का सैंपल ले लिया है और वह कल शाम मे बतायेगा की कायदा को क्या हुआ था सभी लोग ये दुआ कर रहे थे की ब्लड सैंपल मे कुछ ना निकले 
आखिरकार ब्लड सैंपल की रीपोर्ट आ गयी थी
कायदा को कोई गंभीर बीमारी नहीं थी बस नन्ही सी उम्र मे दूसरो का ख्याल रखते -रखते खुद का ख्याल रखना भूल चुकी थी उसने बड़ी ही मासूम भरी अदा से पूछा आप आ गये इमाम चाचा आप कैसे है मै ठीक हूँ मुझे कुछ नहीं हुआ है मै अभी जाकर कैंप के सभी बच्चो को एकट्ठा करके उनके साथ खेलुगी बड़ा मजा आएगा
इमाम चाचा ने कहा अभी कही जाने की जरूरत नहीं है चुपचाप से लेटी रहो, दोनों एक दूसरे की आंखों मे देखकर मुस्कुराने लगे
कायदा धीरे धीरे बड़ी हो रही थी उसी माहौल मे इमाम चाचा अब कायदे के भविष्य के बारे मे सोच रहे थे की कैसे कायदों को एक अच्छी तालिम मिले एवं वहाँ रिफ्यूजी कैम्प मे जितने भी बच्चे है उन्हें भी एक बेहतर शिक्षा मिले इसके लिए इमाम चाचा ने अपने सिनियर अधिकार से बात करके वहाँ एक छोटा से स्कूल की व्यवस्था करवा दी ताकि वहाँ जो भी बेसहारा बच्चे है कम से कम आने वाले समय मे पढ़कर इस लायक हो जाए की औरो का सहारा बन सके स्कूल मे बच्चों को शिक्षा देने की शुरुआत हो चुकी थी
कायदा वहाँ मन लगाकर पढ़ाई कर रही थी इसी तरह दिन बीत रहे थे एकदिन अचानक आतंकियों ने रिफ्यूजी कैंप को निशाना बनाया जो लाचार बेबस निदोॅष लोग का एक सहारा था अंधाधुंध गोलियां चली आतंकवादी और सुरक्षाबलों के बीच ना जाने कितने मासूमो की लाश बिछ गयी उम्मीद की जो किरणों जिनके आंखो मे जागी थी वो आंखे शायद सदा के लिए बुझ गयी
बच्चे बूढ़े औरते हर जगह केवल मासूमो की चीखें और उनकी बेबसी एक खामोशी बनकर शांत हो गयी सदा के लिए
किसी तरह इमाम चाचा कायदा को और खुद को बचाने मे सफल हो गये थे उनका दिल भी अब इस दृश्य से इतना बेचैन हो गया की उनका भरोसा शायद इंसानियत से उठ चुका था लेकिन कायदा को अभी भी ये यकीन था कही न कहीं की इंसानियत अभी नहीं मरी है एक दिन मंजर बदलेगा उसके मुल्क मे लोग फिर से मुस्कुराऐगे वो एकबार फिर बेखौफ होकर अपने घर के बाहर अपने दोस्तो के साथ खेल सकेगी वो एक बार फिर अपने स्कूल जा सकेगी अपने स्कूल के दोस्तों के साथ पढ़ सकेगी
उसे हर जगह मुस्कुराते हुए लोग दिखेगे जहाँ भी वो जाएगी कही कोई उदास नहीं होगा सब खुश होगे
हिंसा का नामोनिशान नहीं होगा उसे यकीन था क्योंकि कायदा को शांति अमन सौहार्द पर भूरा भरोसा था

उसे इस बात का दु:ख था की उसके साथ ही ऐसा बार -बार क्यों होता है एक बार उसका परिवार उससे छीन गया मुश्किल से दूबारा उसने नयी शुरुआत की तो इसका भी अंत वैसा ही हुआ उसके दोस्त रिफ्यूजी कैंप के तमाम लोग जिन्हें वो अपना समझती थी जिनके साथ उसने दुबारा मुस्कुराना सीखा था उन्हें फिर से खो दिया
कायदा के आंखों मे आंसू थे इस हिंसा के लिए तो हर बार मानवता को तार -तार कर देती है लेकिन उसने तय किया की वो फिर से नयी शुरुआत लाएगी वह अमन शांति के राह पर ही चलकर लोगों की मदद करती रहेगी ये उसका फैसला था जिसे बड़ा से बड़ा तूफान भी नहीं हिला सकता था क्योंकि कायदा बहुत मजबूत बन चुकी थी उसने भावनाओं पर काबू करना सीख लिया था इमाम चाचा ने नौकरी छोड़ दी और कायदा को इस हिंसा के माहौल से दूर ले गये जहाँ उसकी परवरिश अच्छे से हो सके एक शांत माहौल मे
आज कायदा बड़ी हो चुकी है और वो एक सफल समाजसेविका है जो हर रिफ्यूजी कैंप मे अनाथालय मे हर उस जगह जाकर उनकी सेवा करती है जिन्हें इसकी जरूरत है कायदा के इसी सेवा भाव को देखकर आज उसे शांति का पुरूस्कार मिलने वाला है जहाँ इमाम चाचा उसके साथ वहाँ उसके अभिभावक के रूप मे शामिल होगे
ये कार्यक्रम पूरे देश के टीवी चैनलों पर दिखाया जाने वाला  है तथा रेडियो पर प्रसारित होने वाला है
कायदा अपने तय समय पर इमाम चाचा को लेकर वहाँ पहुंच गयी थी उसे पुरस्कार जब दिया जाने लगा तो उसने कहा की उसकी इच्छा है की ये पुरस्कार मेरे पिता मुझे दे उसने इमाम चाचा की तरफ ईशारा किया ये देखकर इमाम चाचा के आंखों मे आंसू आ गये किसी तरह से उन्होंने खुद को संभाला और अपनी सबसे प्यारी बेटी को शांति का पुरूस्कार दिया उसे कायदा किसी फरिश्ते सी लग रही थी और कायदा को इमाम चाचा फरिश्ते जैसे लग रहे थे
अब कायदा से दो शब्द कहने के लिए कहा गया कायदा ने इसके लिए आभार प्रकट किया और उसने सबसे पहले अपने इमाम चाचा की तारीफ की उन्हें जन्नत का फरिश्ता बताया फिर कायदा ने कहा
हम एक ऐसी दुनिया मे जी रहे है जहाँ लोग केवल भाग रहे है इधर से उधर केवल अपनी ताकत को बढ़ाने के लिए केवल अपना दबदबा बनाने के लिए लेकिन ऐसी ताकत किस काम की जो एक पिता से उसकी बेटी छीन ले एक पति से उसकी पत्नी छीन लें एक माँ से उसकी औलाद छीन ले एक भाई से उसकी बहन एक आम आदमी से उसका घर उसका गली जिसमें वो बड़ा हुआ है एक नागरिक से उसका देश ये होड़ क्यों लगी है इन हथियारों की

जब गोली चलती है तो केवल जान ही जाती है चाहे कोई सौनिक हो या आतंकी सबका परिवार है सबके बच्चे है  जिन्हें अपने पिता का इंतजार है जिन्हें अपने पति का इंतजार है जिन्हें अपने बेटे का इंतजार है जो कभी नहीं लौटते उनके परिवार पर क्या बितता है ये भला कौन जानता है हम ऐसी दुनिया क्यो नही बनाते जहाँ की हर एक बुनियाद प्रेम पर टिकी हो ना की हथियारों और हिंसा पर जबतक हम इसे स्वीकारेंगे नहीं जब तक हम इसे बदलेगें नहीं ये ऐसे ही चलता रहेगा ये हमे समझना होगा की असली ताकत शांति प्रेम और सच्चाई से आती है ना की हथियारों की होड़ और हिंसा से यह कहकर कायदा ने अपनी बात समाप्त की
सारा देश कायदा की बात सुनकर केवल शांत था सबकी आंखों मे कही एक उम्मीद जागी थी की हम ऐसा कर सकते है अगर ऐसा होता है तो ना जाने पूरे विश्व मे कितने मासूम लोगों की जान बचा सकती है कितनी कायदा अनाथ होने से बच जाएगी कितने इमाम चाचा को वो सब नहीं देखना पड़ेगा जो उन्होंने देखा
आतंकवाद समस्या है पर उससे भी बड़ी समस्या है गंदी राजनीति जब राजनीति साफ होगी तो कभी आतंकवाद समस्या बनेगा ही नहीं क्योंकि समस्या होने से पहले समाधान निकल जाएगा
हमे भी शायद कायदा की ही तरह सोचना चाहिए
क्योंकि इतिहास लोगों से ज्यादा उनकी कहानियो को पसंद करता है लोग अक्सर दूसरो की तकलीफों को नजरअंदाज कर देते है क्योंकि उन्हें उनकी कहानियों मे कुछ ज्यादा ही रूचि होती है लेकिन शायद वो भूल जाते है की उनकी भी एक कहानी है शायद उनकी कहानी को इतिहास कभी याद रखें भी या सदा के लिए भूल जाए

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