उम्मीद की एक किरण

अब क्या होगा यहाँ पर तो कोई भी शायद मुझे बचाने नही आएगा और मै भी शायद अब बच नही पाऊँगा, मै अपने बच्चो का मुस्कुराता चेहरा अब शायद कभी नहीं देख पाऊँगा मेरी पत्नी जिसने मेरा हाथ थामा हमारा बचपन का प्यार था उसने मुझे पर भरोसा किया उसने मुझ से शादी की और शादी करते वक्त एक वचन लिया था की मै उसे कभी अकेले छोड़ कर नहीं जाऊँगा मैने भी उसे वचन दिया था की उसे कभी छोड़कर कभी नहीं जाऊँगा 

अब ऐसा लगता है की मै इस वचन को पूरा नहीं कर पाऊँगा, मै शायद उसके भरोसे को नहीं निभा पाऊँगा, मै अपनी माँ को शायद अब कभी नहीं देख पाऊँगा मेरी माँ का मुस्कुराता चेहरे ही तो मेरे बचपन की ताकत रही है जिसके भरोसे मैने जीवन के हर कठिनाइयों का सामना किया है पर इस कठिनाई मे मुझे मेरी माँ का वो मुस्कुराता चेहरा धुंधला सा होता नजर आ रहा है मै घायल हूँ मुझे गोली लगी है मेरे सारे साथी मिशन मे मारे गये है हवाई हमले मे

हमारा शिप बुरी तरह तबाह हो गया है उन्होंने हमारे शिप पर आसमान से हवाई हमला किया और जो बच गऐ जिन्होंने पानी मे छलांग लगाई उन्होंने उन पर अंधाधुंध गोलियां बरसाई मुझे गोली लग गयी मै एक पानी मे बहते लकड़ी के तख्ते के सहारे इस निर्जन टापू पर आ गया हूँ उम्मीद नहीं है की अब कोई मुझे बचाने भी आएगा

मै तड़प रहा हूँ मुझे बहुत तकलीफ हो रही है पर उससे भी ज्यादा तकलीफ इस बात की है की मेरा शहर जिसमें मै पैदा हुआ बचपन गुजारा जहाँ पढ़ाई की जहाँ मै बड़ा हूँ कॉलेज गया पढ़ाई पूरी कर नेवी मे गया वो सारी सुनहरी एक -एक यादे मुझ से छूट रही है मेरा शहर मुझ से छूट रहा है मेरा देश जिसके लिए मै हर जन्म शहीद होना पसंद करूँगा उसका साया छूट रहा है उसकी वो मन को मोह लेने वाली हवाएँ छूट रही है वो शहर की रौनक वो शहर के लोग छूट रहे है क्या मै अब इन्हें दुबारा देख पाऊँगा ये सवाल उसने खुद से पूछा मगर कोई भी उत्तर उसके पास इस प्रश्न का नहीं था

सांसे जोर से चल रही थी ऐसा लग रहा था की एक -एक सांसे उखड़ रही हो उसके आंखों के सामने धीमे- धीमे अंधेरा छा रहा था उसे लग रहा था की आज वो इसी निर्जन टापू पर दम तोड़ देगा 

तभी उसको अपने एक साथी की बात याद आयी मौत तो सबको आती है पर हम उसे कुछ समय के लिए उलझा तो सकते है क्यो ना हम कोशिश करके मरे 

जब उसे ये बात याद आयी तो उसे लगा की उसके शरीर मे जैसे फिर से जान आ गयी है तभी उसने देखा दूर से कछुए के बच्चे धीमी गति से समंदर की तरफ बढ़ रहे है और कितने ही समुद्री पक्षी उन बच्चों का शिकार कर रहे है पर उनमें से एक बच्चा समंदर तक पहुँचने मे सफल हो गया और वो समंदर की गहराई मे चला गया उन शिकारी पक्षियों से दूर इतना देख अब उसे लग रहा था शायद वो बच जाएगा क्योंकि उम्मीद की किरण उसे नजर आ रही थी वो जान गया था की कोशिश अगर दिल से की जाती है तो सफलता जरूर मिलती है और मै तो एक सिपाही हूँ अपने देश का मौत से सामने इतनी जल्दी कैसे हथियार डाल दूं मै लड़ूंगा अंतिम सांस तक 

मुझे मेरे बच्चों को दुबारा से देखना है उनके साथ जी भर के खेलना है मुझे मेरी पत्नि से किया गया वादा पूरा करना है जो मैने उसे शादी करते वक्त दिया है मुझे उसके साथ पूरी उम्र गुजारनी है मुझे मेरी माँ का मुस्कुराता चेहरा फिर से देखना है जो मेरी सबसे बड़ी ताकत है मुझे मेरे शहर की वही ठंडी हवा मे सांस लेना है जो मुझे सबसे ज्यादा सुकून देती है मुझे मेरे देश के और काम आना है मुझे अपना मिशन पूरा करना है मै लड़ूंगा क्योंकि इसी के लिए तो मै बना हूँ मै इस निर्जन टापू पर अपनी जीवन की जंग जीत के लौटूंगा क्योंकि मैने यही सीखा है उसके कंधे पर गोली लगी थी किसी तरह उसने खून को बहना रोका और आखिरी हिम्मत जुटा कर कुछ लकड़ियों को इकट्ठा करके आग जलाई तब तक पूरी तरह अंधेरा हो गया था मगर उसके जीवन मे तो उम्मीद का एक नया सवेरा हुआ था किसी तरह रात भर उसने खुद को बचाए रखा अपने ही जज्बात से और अपने घायल शरीर से रात भर उसने बहादुरी से जंग लड़ी 

उसने देखा सवेरा होने वाला दूर आकाश पर हल्की सी रोशनी दिख रही थी उसे अच्छा लग रहा है जैसे- जैसे सूरज का प्रकाश क्षितिज के चारो ओर फैल रहा था उसकी हिम्मत जवाब दे गयी थी उसकी आंखे बंद हो रही थी तभी उसने एक धीमी आवाज सुनी जो धीरे धीरे तेज होती जा रही थी जैसे कोई मोटरबोट की आवाज हो अब उसकी आंखे बंद हो चुकी थी मगर जब उसकी आंखे दूबारा खुली तो उसके सामने उसके बच्चे उसे बहुत प्यार भरी निगाह से देख रहे थे जैसे कह रहे हो की हमारे साथ अभी खेलो उसकी पत्नी उसके सामने खड़ी थी जिसके आंखों मे खुशी के आंसू छलक रहे थे उसके बगल में उसकी माँ बैठी थी जिसका चेहरे पर आज एक अलग ही मुस्कान थी जिस मुस्कान मे अपने बेटे के लिए केवल प्यार ही प्यार था उसने दूसरी तरफ देखा तो उसका वही शहर की सड़के थीं जिसपर ठंडी हवाएँ बह रही थी जो आज खिड़की से अंदर आकर उसके सर को जैसे सहला रही हो उसने वाकई मे जंग जीत ली थीं उस कछुए के बच्चे की तरह जो शिकारी पक्षियों से बचकर समुद्र की गहराईयो मे जाने मे सफल हुआ था 

यह एक काल्पनिक कहानी है जिसका मकसद केवल और केवल यह बताने का है हमे कभी हार नहीं मानना चाहिए चाहे परिस्थितियाँ आप के कितने ही विपरीत क्यों ना हो शायद इसी को जीवन जीना भी कहते हैं

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